Saturday, December 18, 2010

दिल्ली : भारत की जान /लालकिला /पुनीत कुमार


 

 

दिल्ली : भारत की जान /लालकिला /पुनीत कुमार





आप सभी यह सोच रहें होंगे कि आखिर दिल्ली में ऐसा क्या है, जिसके कारण दिल्ली को भारत की जान कहा जाता है
भारत में इतने अच्छे- अच्छे शहर होते हुए भी दिल्ली भारत की जान क्यों है?इन्ही सवालो का जवाब देने हम आपको दिल्ली और उसके आसपास के ऐसे शहरों के बीच ले जायेंगे जिसे देखकर आप खुद भी बोल उठेंगे कि सही में दिल्ली भारत की जान है

आइये. तो सबसे पहले चलते है दिल्ली के लालकिले में, जो भारत की आन बान और शान तीनो है
स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरू ने इसी लालकिले की प्राचीर पर चढ़कर राष्ट्र को संबोधित किया था और तब से प्रत्येक वर्ष यह प्रथा चली आ रही है
प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्र को आजादी कि बधाई देते हुए नागरिको को उनके कर्तव्यों के प्रति भी सचेत करते हैं


लालकिला


भारत की राजनीतिक,सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान के रूप में खड़ा लालकिला दिल्ली के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक इमारतो में से एक है
इसकी नीँव शाहजहाँ ने १६३९ में रखी थी और निर्माण कार्य १६४८ में पूरा हो गया
यह कहा जाता है इसे बनाने में एक करोड़ रुपये का खर्च आया था

इसके निर्माण हेतु विदेशो से लाल बलुआ पत्थर लाया गया था
पहले लालकिले के चारो और नदी का पानी भरा होता था किंतु आजकल इसके आसपास काफी परिवर्तन आ गया है
लालकिले के दो मुख्य द्वार है , लाहौरी गेट और दिल्ली गेट
लाल किले के मुख्य प्रवेश द्वार लाहौरी गेट के द्वारा होता है
अन्य द्वार आगंतुकों के लिए बंद किये हुए है

किले के अंदर के अनेक आकर्षक भवन हैं, जोकि लालकिले की निर्माण शैली की भव्यता को दर्शाता है


दीवान-ये-आम :- दीवान-ये-आम मुख्यत: आम लोगो के मिलने की जगह थी जिसमे शाहजहाँ अपनी प्रजा की परेशानियो को सुनते और हल किया करते थे
इस सभागृह पर बड़े पैमाने पर सोने का पानी चढ़ा हुआ था और इसकी दीवारों पर बहुत ही सुंदर नक्काशी की गयी थी.किंतु आज केवल उसके कुछ निशानियाँ ही शेष हैं


हमाम :-महाराजा और रानियो के स्नान हेतु हमाम का निर्माण किया गया था
यहाँ पर शाही स्नान की व्यवस्था थी. इसके गलियारों में बहुत ही सुंदर हीरे और जेवरात जड़े हुए थे. और फूलो की नकाशी बहुत ही सुंदर की गयी थी.किंतु अन्य इमारतों की तरह यहाँ से भी हीरे निकाल लिये गये हैं,मात्र गड्ढे ही रह गये हैं


मोती मस्जिद :- मोती मस्जिद हमाम के पश्चिम में स्थित है
इसमें शाहजहाँ अपने शुभचिंतकों के साथ नमाज अदा किया करते थे
इसके गुबंद की नक्काशी बहुत ही सुंदर ढंग से की गयी है.

मुमताज महल :-मुमताज महल एक सुंदर सी नदी के किनारे स्थित था.हालाँकि अब इसे हटा लिया गया है. क्योकि अब यह खंड्हर बन गयी है.

तो देखा आपने लालकिले की इसी खासियत की वजह से इसे दिल्ली की जान कहा जाता है
कुछ ऐसे ही दिलचस्प स्मारको के बारे में हम आपको बताते रहेंगे, तब तक के लिए शब्बाखैर...

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